तुलसाजी संग सात फेरे लेने के लिए 109 गांवो से सज-धज कर रथ में सवार होकर पहुंचे ठाकुरजी:-

वल्लभनगर। उदयपुर जिले के वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के भटेवर में रेलवे पुलिया के पास स्थित अंतरराष्ट्रीय प्रभुकृपा आश्रम में पहली बार तुलसाजी के संग सात फेरे लेने के लिए 109 गांवो से ठाकुरजी पधारे। दरअसल प्रभुकृपा आश्रम में पहली बार छोटी दीपावली के त्योहार पर 109 तुलसाजी व ठाकुरजी का विवाह समारोह संपन्न हुआ। वहीं पांच गांवो के श्रद्धालु तुलसाजी व ठाकुरजी के मायरा भरने के लिए पहुंचे। जिले के वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के भटेवर में रेलवे पुलिया के पास प्रभुकृपा आश्रम में पहली बार हुए विशाल धार्मिक आयोजन में उम्मीद से ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। तुलसी विवाह समारोह में करीब 200 से ज्यादा गांवो से 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु इस ऐतिहासिक धार्मिक पल के साक्षी बने। ठाकुरजी की आराधना करने के लिए श्रद्धालुओं ने अपने पलक पावड़े बिछा दिए। इस ऐतिहासिक समारोह में राजनीतिक पार्टियों से जुड़े नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं के साथ समाजसेवियों ने भी धार्मिक लाभ लिया। अंतर्राष्ट्रीय प्रभुकृपा आश्रम के संचालक पन्नालाल मेनारिया ने बताया की तुलसाजी संग विवाह रचाने के लिए 109 गांवो से शाही लवाजमे एवं राजसी ठाट-बांट के साथ सजे धजे रथ में सवार होकर ठाकुरजी आश्रम में पहुंचे। ठाकुरजी की बारात में महिलाएं, पुरुष, युवक, युवतियां एवं बड़े बुजुर्गों के साथ छोटे बच्चे मेवाड़ी वस्त्रों में सज धज कर नाचते गाते जयकारे लगाते हुए पहुंचे। आश्रम में पलक पावड़े बिछाए खड़े श्रद्धालुओं द्वारा ठाकुरजी का पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत सत्कार किया। तोरण की रस्म अदा करने के बाद तुलसाजी संग सात फेरे लेने के लिए ठाकुरजी यज्ञशाला में पहुंचे। यज्ञशाला में विवाह संस्कार को लेकर के श्रद्धालुओं द्वारा संपूर्ण रीति रिवाज एवं विवाह की रस्मे निभाई गई। छोटी दीपावली पर शुभ मुहूर्त में पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तुलसाजी व ठाकुरजी का विवाह समारोह शुरू हुआ। यज्ञशाला में विधिविधान से सात फेरे व पानी ग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। यज्ञशाला में 109 जोड़ो ने सामूहिक रूप से हवन में आहुतियां अर्पित करते हुए ठाकुरजी व तुलसाजी का विधिविधान से विवाह संपन्न करवाया। विवाह के बाद पांच गांवो के श्रद्धालुओं द्वारा तुलसाजी के मायरा भरने की रस्म निभाई गई। इस दौरान बारातियों को उपहार के रूप में प्रतीक चिन्ह व ऊपरना पहना कर स्वागत किया गया। इस विशाल धार्मिक आयोजन को लेकर के श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का आयोजन हुआ। जिसमें करीबन 50 हजार से ज्यादा भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। विवाह एवं मायरा की संपूर्ण रस्मे व रीति रिवाज होने के बाद विदाई समारोह आयोजित हुआ। जिसमे श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर ठाकुरजी के संग तुलसाजी को विदा किया। इस दौरान श्रद्धालुओं के आंखों से भक्ति के आंसू बहने लग गए। इस विशाल धार्मिक आयोजन को लेकर के राष्ट्रीय राजमार्ग 48 के पास दिनभर मेला जैसा माहौल रहा।