उदयपुर। श्री हुक्मगच्छीय साधुमार्गी शान्त-क्रान्ति संघ के आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. की निश्रा में गंगाशहर निवासी मुमुक्षु सुश्री मधु भूरा की जैन भागवती दीक्षा गुरूवार को भव्य रूप से सम्पन्न हुई। आचार्य श्री ने दीक्षा के बाद मुमुक्षु का नामकरण मनोरथश्री जी किया, जैसे ही नवीन नामकरण हुआ तो चहुंओर से हर्ष-हर्ष जय-जय, केसरिया-केसरिया आज हमारो मन केसरिया के उद्घोष के साथ वातावरण गूंजायमान हो गया।
कानोड़ शान्त-क्रान्ति संघ के अध्यक्ष सुरेशचंद दक ने बताया कि आचार्य श्री जी ने दीक्षा का लाभ कानोड़ श्रीसंघ को प्रदान किया था। दो दिवसीय दीक्षा प्रसंग के चलते नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो विभिन्न क्षेत्रों से होती हुई समारोह स्थल पर पहुंची। शाम को आयोजित सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू भूरट ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष सुरेशचंद दक ने की। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में केन्द्रीय संघ के महामंत्री सी.ए. विरेन्द्र जैन, कार्यकारी अध्यक्ष नरेन्द्र हिंगड़, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रोशनलाल बम्ब, माणकचंद भूरा, मानमल मेहता थे। समारोह में मुमुक्षु एवं उनके परिजनों का संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं अन्य श्रीसंघ के पदाधिकारियों ने बहुमान किया। वहीं कानोड़ के तेरापंथ संघ ने मुमुक्षु का बहुमान किया। कानोड़ श्रीसंघ के मंत्री पारसमल मुर्डिया ने बताया कि गुरूवार प्रातः मुमुक्षु की महाभिनिष्क्रमण यात्रा निकली, यात्रा दीक्षा प्रांगण स्थल पर पहुंचने के पश्चात् आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. ने उपस्थित श्रावक-श्राविका, श्रीसंघ एवं संघ के पदाधिकारियों से अनुमति लेकर मुमुक्षु को दीक्षा के प्रत्याख्यान करवाए। दीक्षा के पश्चात् नवदीक्षिता मनोरथश्री जी ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को मांगलिक प्रदान की। आचार्य श्री ने बड़ी दीक्षा की अनुमति 25 अप्रेल को बिलोदा श्रीसंघ को प्रदान की। कार्यक्रम के पश्चात् आचार्य प्रवर श्री जी की मांगलिक के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उपाध्याय श्री जितेश मुनि जी म.सा., रत्नेश मुनि जी म.सा., विनोद मुनि जी म.सा. आदि ठाणा एवं महाश्रमणीरत्ना प्रभावती जी म.सा., महासती श्री पुष्पावती जी म.सा., महासती श्री तारा कंवर जी म.सा., महासती श्री विजयलक्ष्मी जी म.सा., महासती श्री कनकश्री जी म.सा. एवं महासती श्री इंदुप्रभा जी म.सा. आदि ठाणा का सानिध्य भी प्राप्त हुआ। दीक्षा कार्यक्रम में भारत के कोने-कोने से सैंकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम पश्चात् सकल समाज का स्वामीवात्सल्य का आयोजन भी किया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम का संचालन अनिल बाबेल ने किया।