
योग: बचपन से ही योग की साधना
दर्शना योग को केवल शरीर का व्यायाम नहीं मानतीं। उनके लिए यह आत्मा की शुद्धि, मन की शांति और समाज की सेवा का माध्यम है। उन्होंने न केवल स्वयं योग सीखा, बल्कि अपने ज्ञान और अभ्यास को आगे भी बढ़ाया। अब तक 100 से अधिक बच्चों को योग सिखा चुकी हैं। बचपन से ही प्रकृति के करीब रही दर्शना ने मात्र 5 वर्ष की उम्र में योग को अपनाया। उन्होंने अपने घर के आंगन में माँ-पिता के साथ योग करना शुरू किया, जो धीरे-धीरे उनके जीवन का आधार बन गया।


प्रकृति के बीच योग: एक संदेश, एक अभियान
योग के साथ-साथ दर्शना ने एक और रास्ता चुना — प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण। दर्शना का मानना है कि “योग और प्रकृति का गहरा संबंध है। प्रकृति में ही सच्ची शांति और शक्ति है। अगर हम उसे नष्ट करेंगे, तो हमारा भविष्य भी अंधकारमय होगा।” इसलिए ऐसे प्राकृतिक स्थानों और बावडियो पर जाकर योग करती है । खेतों, पहाड़ियों, नदी किनारे और बगीचों में योग करते हुए प्रकृति से जुड़ाव और उसका संरक्षण करने का संदेश दिया ।


परिवार बना शक्ति, गुरु बनी मार्गदर्शक
दर्शना के माता-पिता भावना महेश पालीवाल दोनों ही सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने बचपन से ही दर्शना को न केवल योग, बल्कि सेवा और अनुशासन की भावना दी। दर्शना की योग प्रशिक्षिका केंद्रीय विद्यालय देवगढ़ की मोनिका कुमारी का कहना है की उम्र भले छोटी हो, लेकिन इस उम्र में कई आसन और प्राणायाम आसानी से कर लेती है”


भविष्य की दिशा: अंतर्राष्ट्रीय मंच की तैयारी
दर्शना का सपना है कि वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की योग शिक्षिका बने, साथ ही एक ऐसी पर्यावरण कार्यकर्ता, जो पूरी दुनिया को जागरूक कर सके। वह कहती हैं: “मैं भारत की संस्कृति को पूरे विश्व में पहुँचाना चाहती हूँ। योग और प्रकृति को साथ लेकर चलना ही असली जीवन है।”
“योग ने मुझे आत्मबल, अनुशासन और सेवा की भावना दी है। मैं चाहती हूं कि हर बच्चा योग से जुड़े, ताकि उनका शरीर भी स्वस्थ हो और मन भी शांत।”
दर्शना पालीवाल
योगा गर्ल
