
इसके साथ ही बोली अनुसार वैदिक रीति से ध्वजादंड की स्थापना सत्यनारायण विजावत, माता पार्वती की स्थापना जानकी विजावत, वरुण कलश की स्थापना बद्रीलाल और ओंकार विजावत,गणपति स्थापना सुरेश विजावत, कार्तिक स्वामी की स्थापना शिवनारायण विजावत, कश्यप स्थापना सत्यनारायण विजावत ने की।

कलश स्थापना के बाद यज्ञाचार्य जगदीश विजावत के सानिध्य में मुख्य यजमान नरेंद्र विजावत और हिरालाल विजावत ने हवन की पूर्णाहुति दी। इसके बाद आरती और महाआरती हुई। सुबह बैंडबाजों के साथ नृसिंह भगवान की बेवाण यात्रा निकाली गई। जिसमे समाजजन शामिल हुए।
इससे पूर्व प्रातःकाल मंदिर परिसर में पंडितों ने गणपति मातृका पूजन, रुद्राभिषेक, शिवस्तुति आहुति जैसे अनुष्ठान पूरे विधिविधान से सम्पन्न कराये। आयोजन चौबीसा समाज के विजावत गोत्रीय परिवारों द्वारा किया गया जिसमें समाज के चौग्रामी से आए पंचों का स्वागत किया गया। अंत में महाप्रसादी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
